60 Jaun Elia Shayari | मशहूर शायर जौन एलिया के Best शेर
आदाब दोस्तों! कैसे हो आप सब? उम्मीद है सब खैरियत से होंगे।
आज का ये पोस्ट उन लोगों के लिए है जो शायरी की दुनिया में सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि ‘जुनून’ और ‘बगावत’ तलाशते हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उर्दू अदब के उस शहंशाह की, जिनकी शायरी में दर्द भी है, गुस्सा भी और एक अजीब सा अकेलापन भी—यानी जौन एलिया (Jaun Elia)।
दोस्तों, जौन सिर्फ एक शायर नहीं थे, वो एक ‘मिजाज’ थे। उनकी शायरी दिल के उन कोनों को छू लेती है जहाँ हम खुद भी जाने से डरते हैं। अगर आपका दिल टूटा है, या आप दुनिया के तौर-तरीकों से तंग आ चुके हैं, या फिर आप बस गहरी और कड़वी सच्चाई वाली शायरी पसंद करते हैं, तो जौन एलिया से बेहतर और कोई नहीं।
तो चलिए, आज मैं आपके लिए लेकर आया हूँ जौन एलिया के कुछ ऐसे चुनिंदा Shayari Status, जो आपके WhatsApp और Instagram पर तहलका मचा देंगे। इन्हें शेयर करना मतलब अपनी ‘इंटेलिजेंट’ और ‘गहरी’ पसंद का सबूत देना है!
Jaun Elia shayari
हमने भी जीने की कोशिश बहुत की,
पर हर बार ज़िंदगी हमसे जीत गई।
तुम्हें भूल जाना इतना आसान नहीं,
जितना तुमने हमें भुला दिया।
अब किसी से उम्मीद नहीं रखते,
क्योंकि हमने अपनों को बदलते देखा है।
हम तो खुद से भी थक गए हैं,
तुमसे क्या शिकायत करें।
मोहब्बत में जो खोया है हमने,
वो शायद खुद को ही पाया है।
किसी ने पूछा हाल हमारा,
हमने हंसकर दर्द छुपा लिया।
अब दिल नहीं करता किसी से बात करने का,
क्योंकि हर कोई समझने वाला नहीं होता।
तुम्हारी यादें भी अजीब हैं,
कभी सुकून देती हैं, कभी रुला देती हैं।
हमने हर रिश्ता निभाया दिल से,
और हर रिश्ता हमें छोड़ गया।
ज़िंदगी से कोई गिला नहीं,
बस जो मिला वो अधूरा मिला।
अब तो आदत सी हो गई है अकेलेपन की,
लोग मिलते हैं पर अपने नहीं लगते।
तुमसे दूर होकर भी तुम ही में रहते हैं,
ये कैसा रिश्ता है जो टूटता ही नहीं।
हमने चाहा था बहुत कुछ इस जिंदगी से,
पर मिला वही जो लिखा था।
कभी खुद से भी मिल लिया करो,
बहुत दिनों से तुम भी अनजान हो।
दिल को समझाया बहुत,
पर वो आज भी तुम्हारा ही है।
अब तो खामोशी ही अच्छी लगती है,
क्योंकि लफ्ज़ अक्सर धोखा दे जाते हैं।
हम भी कभी हंसते थे खुलकर,
अब तो मुस्कुराना भी बोझ लगता है।
जो लोग कहते थे साथ देंगे,
वही सबसे पहले छोड़ गए।
ज़िंदगी ने हर बार गिराया हमें,
और हमने हर बार खुद को संभाला।
अब किसी से दिल लगाने का मन नहीं,
क्योंकि दिल बार-बार टूटता नहीं।
एलिया की शायरी
मैं भी अजीब हूँ, खुद से ही नाराज़ रहता हूँ,
जिसे पा नहीं सकता, उसी का इंतज़ार करता हूँ।
हमने सच बोल दिया तो लोग खामोश हो गए,
झूठ कहते तो शायद महफ़िल में रहते।
ये जो दिल है ना, बड़ी अजीब चीज़ है,
टूटता वहीं है जहाँ सबसे ज़्यादा यकीन होता है।
अब किसी से कोई शिकायत नहीं रही,
शिकायत करने वाले ही नहीं रहे।
मैंने खुद को भी खो दिया उसे पाने में,
और वो फिर भी मेरा ना हुआ।
हमसे पूछा गया वजह उदासी की,
हमने मुस्कुराकर बात टाल दी।
ये जो तन्हाई है, अब अपनी सी लगती है,
लोगों से ज्यादा सच्ची लगती है।
तुम्हें भूलने की कोशिश में,
हम खुद को ही भूल बैठे।
हर किसी को समझाना जरूरी नहीं होता,
कुछ लोग समझने के लिए बने ही नहीं होते।
हमने चाहा था सुकून ज़िंदगी में,
पर सुकून भी हमसे दूर भागता रहा।
अब तो खुद से भी बात नहीं होती,
इतनी खामोशी कहाँ से आ गई।
वो जो कहते थे कभी छोड़ेंगे नहीं,
आज वो ही सबसे दूर खड़े हैं।
दिल को बहलाने के लिए बहुत कुछ है,
पर दिल है कि मानता ही नहीं।
हमने हर रिश्ता निभाया पूरी सच्चाई से,
शायद इसी वजह से हर रिश्ता टूट गया।
तुम्हारी यादें भी अजीब सज़ा हैं,
ना जीने देती हैं, ना मरने देती हैं।
अब मोहब्बत से डर सा लगता है,
जैसे कोई पुराना ज़ख्म फिर से खुल जाएगा।
हम भी कभी खास थे किसी के लिए,
अब तो बस एक किस्सा बनकर रह गए।
जो मिला नहीं उसी की चाहत रही,
जो मिला उसे कभी चाहा ही नहीं।
ज़िंदगी से कोई गिला नहीं हमें,
बस जो चाहा था वो मिला नहीं।
अब किसी पर यकीन करना मुश्किल है,
क्योंकि हमने सच को भी बदलते देखा है।
मशहूर शायर जौन एलिया के बेहतरीन शेर
अपने सब यार काम कर रहे हैं
और हम हैं कि नाम कर रहे हैं

अब तो हर बात याद रहती है
ग़ालिबन मैं किसी को भूल गया
अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब मेरी कोई ज़िंदगी ही नहीं
अब भी तुम मेरी ज़िंदगी हो क्या

इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँ तो किसी की नहीं सुनी मैंने
उस गली ने ये सुन के सब्र किया
उस गली ने ये सुन के सब्र किया
जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं

एक ही तो हवस रही है हमें
अपनी हालत तबाह की जाए
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
क्या तकल्लुफ़ करें ये कहने में
जो भी ख़ुश है हम उस से जलते हैं

कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
काम की बात मैंने की ही नहीं
काम की बात मैंने की ही नहीं
ये मेरा तौर-ए-ज़िंदगी ही नहीं

कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे
जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे

कौन से शौक़ किस हवस का नहीं
दिल मेरी जान तेरे बस का नहीं
ख़र्च चलेगा अब मेरा
ख़र्च चलेगा अब मेरा
किस के हिसाब में भला
सब के लिए बहुत हूँ
मैं अपने लिए ज़रा नहीं

जमा हम ने किया है ग़म दिल में
इस का अब सूद खाए जाएँगे
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
ज़िंदगी एक फ़न है लम्हों को
अपने अंदाज़ से गँवाने का
ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
‘जौन’ दुनिया की चाकरी कर के
तूने दिल की वो नौकरी क्या की
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
नहीं दुनिया को जब परवाह हमारी
तो फिर दुनिया की परवाह क्यूँ करें हम
चलते-चलते…
मेरे प्यारे दोस्तों, जौन एलिया को पढ़ना मतलब खुद से रूबरू होना है। वो आपको सच बोलना सिखाते हैं, चाहे वो कितना ही कड़वा क्यों न हो। अगर आप भी जौन के फैन हैं, तो कमेंट्स में उनका अपना पसंदीदा शेर ज़रूर लिखें।
आज आप कौन सी जौन की शायरी अपने स्टेटस पर चिपकाने वाले हो? मुझे इंतज़ार रहेगा!
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